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अधिकारियों की चौखट पर दम तोड़ती व्यवस्था: 6 महीने से पेंशन को तरस रहा नेत्रहीन दिव्यांग
- दैनिक लोक भारती
- 02 Sep, 2026
भुखमरी की कगार पर परिवार रामकोला के माँ अनुसूईया नगर का मामला:
कप्तानगंज तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक लगा चुका है 6से 7 बार चक्कर बड़ा बेटा गंभीर बीमारी से बिस्तर पर,
पैसे के अभाव में छूटी बेटी की पढ़ाई; अब डीएम के आश्वासन पर टिकी आस
मोहम्मद नईम
कुशीनगर। सरकारें भले ही अंत्योदय और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक मदद पहुँचाने का दम भरती हों, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही जमीनी हकीकत को कुछ और ही बयाँ कर रही है। ताजा मामला जनपद कुशीनगर के आदर्श नगर पंचायत रामकोला के वार्ड नंबर 06 (माँ अनुसूईया नगर) का है, जहाँ दोनों आँखों से पूर्ण रूप से दिव्यांग एक व्यक्ति पिछले कई महीनों से आवास और अपनी रुकी हुई पेंशन के लिए अधिकारियों की चौखट पर माथा टेकने को मजबूर है।
पीड़ित दिव्यांग लियाकत अली पुत्र मकसूद अली ने बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी को सौंपे पत्र और बयान में अपना दर्द बयाँ करते हुए बताया कि वह कप्तानगंज तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक के 6 से 7 बार चक्कर काट चुके हैं। बावजूद इसके, जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित विभाग के कानों पर जूँ तक नहीं रेंग रही है।
पेंशन रुकी, दाने-दाने को मोहताज हुआ परिवार
लियाकत अली ने बताया कि बीती मार्च महीने से उन्हें दिव्यांग पेंशन नहीं मिली है। घर में दो बेटे और दो बेटियों समेत कुल चार बच्चे हैं। उनका बड़ा बेटा गंभीर बीमारी के कारण लंबे समय से बिस्तर पर पड़ा है। पहले से ही बेहद कमजोर माली हालत के बीच पेंशन ही इस परिवार का इकलौता सहारा थी, जिससे बीमार बेटे की दवा और घर का खर्च चलता था।
लेकिन पिछले 6 महीनों से पेंशन बंद होने के कारण परिवार भुखमरी की कगार पर पहुँच गया है और आज दाने-दाने का मोहताज है।पैसे की तंगी से छिन गया बच्चों का भविष्यइस प्रशासनिक बेरुखी का सबसे बड़ा खमियाजा लियाकत के बच्चों की शिक्षा को लेकर भुगतना पड़ रहा है।
बड़ी बेटी चांदनी की छात्रवृत्ति (scholarship) बंद होने और घर में पैसे न होने के कारण उसे अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। वहीं छोटी बेटी रुबीना, जो अभी कक्षा 9 की छात्रा है, उस पर भी अब पढ़ाई छोड़ने का संकट मंडरा रहा है।
डीएम ने दिया एक महीने का आश्वासन
अपनी अंतिम आस लेकर पीड़ित दिव्यांग एक बार फिर जिलाधिकारी से मिलने मुख्यालय पहुँचा। लियाकत अली के मुताबिक, इस बार मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने उन्हें एक महीने के भीतर आवास, रुकी हुई पेंशन व अन्य सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने का ठोस आश्वासन दिया है।
अब देखना यह होगा कि इस आश्वासन के बाद कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन जागता है या इस दिव्यांग परिवार की लाचारी यूं ही सड़कों पर भटकती रहेगी।
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